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		<title>Inkscape/C2/Create-and-edit-shapes/Sanskrit - Revision history</title>
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		<subtitle>Revision history for this page on the wiki</subtitle>
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		<id>https://script.spoken-tutorial.org/index.php?title=Inkscape/C2/Create-and-edit-shapes/Sanskrit&amp;diff=41027&amp;oldid=prev</id>
		<title>NaveenBhat: Created page with &quot; {| Border =1 | Time | Narration  |- | 00:00 | नमस्कारः, क्रियेट् एण्ड् एडिट् शेप्स् इति इङ्क्-...&quot;</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://script.spoken-tutorial.org/index.php?title=Inkscape/C2/Create-and-edit-shapes/Sanskrit&amp;diff=41027&amp;oldid=prev"/>
				<updated>2017-11-26T02:41:25Z</updated>
		
		<summary type="html">&lt;p&gt;Created page with &amp;quot; {| Border =1 | Time | Narration  |- | 00:00 | नमस्कारः, क्रियेट् एण्ड् एडिट् शेप्स् इति इङ्क्-...&amp;quot;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;New page&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt; {| Border =1&lt;br /&gt;
| Time&lt;br /&gt;
| Narration&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:00&lt;br /&gt;
| नमस्कारः, क्रियेट् एण्ड् एडिट् शेप्स् इति इङ्क्-स्केप्-पाठार्थं स्वागतम् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:06&lt;br /&gt;
| पाठेऽस्मिन् वयम् : इङ्क्-स्केप् इत्यस्य विषयम् ,&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:10&lt;br /&gt;
| इङ्क्-स्केप्-इण्टर्-फेस् विषयं अपि च आकृतीनां रचनाविषयं ,&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:16&lt;br /&gt;
| वर्णपूरणम् अपि च हेण्डल् इतीमानि उपयुज्य आकृतीनां रूपान्तरकरणम् च कथमिति ज्ञास्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:20&lt;br /&gt;
| पाठमिदं रेकोर्ड्-कर्तुं – अहम् उबण्टु लिनक्स् 12.04 ओपरेटिङ्ग्-सिस्टम्, इङ्क्स्केप्-वर्शन् 0.48.4 च उपयुञ्ज्महे ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:29&lt;br /&gt;
| डेश्-होम्-गत्वा इङ्क्-स्केप् इति टङ्कयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:34&lt;br /&gt;
| लोगो इतीदं द्विवारं नुत्वा इङ्क्-स्केप्-इतीदम् उद्घाटयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:38&lt;br /&gt;
| इण्टर्फेस् इत्यस्योपरि , मेन्यूबार् अपि च टूल्-कण्ट्रोल्-बार् इतीमे पश्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:44&lt;br /&gt;
| अस्यानन्तरम् ऊर्ध्वभागे पार्श्वे च रूलर्स् वर्तन्ते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:48&lt;br /&gt;
| इण्टर्-फेस् इत्यस्य दक्षिणपार्श्वे ,कमाण्ड्-बार् अपि च स्नेप्-कण्ट्रोल्-बार् इतीमानि दृश्यन्ते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:54&lt;br /&gt;
|टूल्-बोक्स् इतीदं, इण्टर्-फेस्-इत्यस्य वामपार्श्वे वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:58&lt;br /&gt;
| मध्ये केन्वास्-वर्तते । अत्रैव वयं ग्राफिक्स् रचयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:03&lt;br /&gt;
| इण्टर्-फेस्-इत्यस्याधः , कलप्-पेलेट् अपि च स्टेटस्-बार् पश्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:09&lt;br /&gt;
|अधुना ,इङ्क्-स्केप्-मध्ये केचन मूलाकृतीः रचयितुम् अपि च परिवतितुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:14&lt;br /&gt;
| आदौ सेलेक्ट् अपि च ट्रान्स्फोर्म् टूल् विषयं ज्ञास्यामः । इदं सेलेक्टर्-टूल् इति कथयन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:22&lt;br /&gt;
|इदं प्रमुखं साधनं वर्तते । इदं टूल्-बोक्स्-इत्यस्य वामपार्श्वे वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:28&lt;br /&gt;
| अनेन साधनेन, ओब्जेक्ट्स्-इतीमानि चेतुं , रूपान्तरं कर्तुं च शक्नुमः । अपि च केन्वास्-मध्ये तेषां स्थानपरिवर्तनञ्च कर्तुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:34&lt;br /&gt;
| नूतनं इङ्क्-स्केप्-सञ्चिकामारचयितुं ,file इतीदं नुदतु । पश्चात् new चित्वा default इतीदं नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:41&lt;br /&gt;
| विद्यमानां सञ्चिकामुद्घाटयितुं ,file इतीदं चित्वा open इतीदं नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:47&lt;br /&gt;
| पूर्वेकृतां drawing_1.svg सञ्चिकाम् उद्घाटयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:53&lt;br /&gt;
|अहमिदं document सञ्चये रक्षितवान् । दक्षिणपार्श्वस्थं open गण्डं नुदन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:01&lt;br /&gt;
| वयम् आयतं रचितवन्तः आसम् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:04&lt;br /&gt;
| अधुना तन्नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:06&lt;br /&gt;
| सामान्यतः आयतस्य हरिद्वर्णं भविष्यति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:09&lt;br /&gt;
| वर्णं परिवर्तितुं अधस्ताद्विद्यमानं कलर्-पेलेट् इत्यस्योपयोगं करवाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:14&lt;br /&gt;
| अतोऽहं ,कर्सर् इतीदं अधः चालयामि अपि च रक्तवर्णं नुदामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:18&lt;br /&gt;
|आयतस्य वर्णं परिवर्तितम् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:22&lt;br /&gt;
| आयतस्य स्थानं परिवर्तयाम । तत्कर्तुं तदूर्ध्वभागे यत्रकुत्रापि नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:27&lt;br /&gt;
|अधुना, मूषकगण्डं नुत्वैव, केन्वास् मध्ये आवश्यकस्थानाय कर्षयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:33&lt;br /&gt;
|पश्चात् मूषकगण्डं त्यजतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:37&lt;br /&gt;
| सम्यग्दृष्टुं ,ज़ूम्-करोतु । तदर्थं ctrl कीलकं नुत्वा मौस्-इत्यय्स स्क्रोल्-बटन्-उपयोगं करोतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:46&lt;br /&gt;
|आयतस्य परितः बाणान् पश्यामः । इमानि हेण्डल्स्-इति कथ्यन्ते । इमानि मापनं कर्तुं परिभ्रमणं कर्तुं च उपयुज्यन्ते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:57&lt;br /&gt;
| कर्सर्-इतीदं यस्यकस्यापि हेण्डल्-इत्यस्योपरि स्थापयामः चेत् , हेण्डल्-इत्यस्य वर्णः परिवर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:02&lt;br /&gt;
| इदं निर्धिष्टस्य हेण्डल् इत्यस्य चयनं वर्तते अपि च रीसैज़्-कर्तुं सिद्धं वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:08&lt;br /&gt;
| आयतस्य मापनं कर्तुम् अथवा रेसैज़्-कर्तुं यत्किमपि कोर्नेर्-हेण्डल् नुत्वा कर्षयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:17&lt;br /&gt;
| भवन्तः तदेवाकृतिं अनुपातञ्च स्थापितुमिच्छन्ति चेत् रीसैज़्-करणकाले Ctrl कीलकं नुदन्नेव करोतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|03:24&lt;br /&gt;
| अयतस्य दैर्घ्यं विस्तारं च परिवर्तितुं , आयतस्य पार्श्वस्थं हेण्डल् उपयुज्यताम् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:32&lt;br /&gt;
|हेण्डल् नुत्वा वामतः दक्षिणतश्च कर्षयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:39&lt;br /&gt;
| आयतस्य विस्तारे परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:43&lt;br /&gt;
|अधुना, आयतस्य दैर्घ्यं परिवर्तयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:46&lt;br /&gt;
| अतः वयं ,आयतस्य ऊर्ध्वस्थं अधस्थं च हेण्डल् नुत्वा कर्षयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:51&lt;br /&gt;
| आयतस्य दैर्घ्ये परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:54&lt;br /&gt;
| टूल्-कण्टोल्-बार् इत्यत्र width अपि च height पेरमीटर्-इतीदं परिवर्त्यापि आयतस्य लम्बं विस्तारञ्च परिवर्तितुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|04:03&lt;br /&gt;
| अहं width इतीदं 400 इति अपि च  height इतीदं 200 इति परिवर्तयामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:07&lt;br /&gt;
| अधुना आयतस्य परिमाणे परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:10&lt;br /&gt;
| एवमेव x अपि च y एक्सिस् परिवर्तनेन ओब्जेक्ट्-इत्यस्य स्थानपरिवर्तनं कर्तुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:19&lt;br /&gt;
|अधुना, आयतस्य परिभ्रमणं कथं करणीयमिति ज्ञास्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:24&lt;br /&gt;
|तत्कर्तुं आयतस्योपरि पुनः नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:27&lt;br /&gt;
| अधुना अश्रिस्थितस्य हेण्डल्-इत्यस्य आकृतिः परिवर्तितम् अपि च परिभ्रमणार्थं सिद्धमस्तीति अवलोकयन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:34&lt;br /&gt;
|अहं दक्षिणाश्रिस्थितं हेण्डल् नुत्वा आयतस्य परिभ्रमणं करोमि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|04:44&lt;br /&gt;
| पार्श्वस्थं यत्किमपि हेण्डल् नुत्वा कर्षयित्वा च आयतपरिभ्रमणं कर्तुं शक्नुवन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:50&lt;br /&gt;
|अहं वामपार्श्वस्य हेण्डल् नुत्वा उपरि अधश्च कर्षयित्वा आयतं परिभ्रमामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:56&lt;br /&gt;
| एवं क्रियमाणे परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:59&lt;br /&gt;
|आगामिपाठे हेण्डल् इत्यस्य विषयमधिकं ज्ञास्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:04&lt;br /&gt;
|अधुना आकृतेः चयनात् विरमाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:06&lt;br /&gt;
|इदं कर्तुं केन्वास् इत्यस्य उपरि अथवा बहिः यत्रकुत्रापि नुदन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:11&lt;br /&gt;
|मूषकम् अहं पुनः टूल्बोक्स्-इत्यत्र तदेव रेक्टाङ्गल् मध्ये आनयामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:17&lt;br /&gt;
|इदं टूल् उपयुज्य, वयं आयतं चतुरश्रं वा चित्रितुं शक्नुमः इति टूल्-टिप् वदति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:22&lt;br /&gt;
|अतः, आदौ इदं टूल् नुदामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:25&lt;br /&gt;
|चतुरश्रं चित्रितुं, ctrl कीलकं नुत्वा केवास् मध्ये कर्षयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:30&lt;br /&gt;
|अस्य वर्णं पाटलं करोतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:32&lt;br /&gt;
|युष्मभ्यम् एकः अभ्यासः वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:34&lt;br /&gt;
|create circle and ellipse इति टूल् , टूल्-बोक्स् इत्यस्मात् चिनोतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:38&lt;br /&gt;
|ctrl कीलकमुपयुज्य केन्वास् इत्यस्योपरि वृत्तं रचयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:42&lt;br /&gt;
| अस्मै नीलवर्णं पूरयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:44&lt;br /&gt;
|इदमस्माकं वृत्तम् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:46&lt;br /&gt;
|अधुना, इदं वृत्तस्य रूपान्तरं कथं करणीयमिति ज्ञास्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:49&lt;br /&gt;
|स्ट्रोक् अपि च एण्ड् पेरामीटर् इतीमे परिवर्तयतु । वृत्तं धनुराकारं कर्तुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:56&lt;br /&gt;
|आकृतीः परिवर्तितुं ,टूल्-कण्ट्रोल्-बार् मध्ये ३ विकल्पानि सन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:03&lt;br /&gt;
|अहमधुना स्ट्रोक्-पेरामीटर्-इतीदं 100 इति अपि च एण्ड्-पेरामीटर् इतीदं -50 इति च परिवर्तयामि ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:09&lt;br /&gt;
|वृत्तस्याकृतिः धनुर्रूपं प्राप्तवतीति ज्ञायते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:14&lt;br /&gt;
|अहमधुना, arc ऐकान् नुदामि । आकृत्यां परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:19&lt;br /&gt;
|वयं circle ऐकान् नुत्वा, आकृतिं पुनः वृत्तं कर्तुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:25&lt;br /&gt;
|अधुना, केन्वास् इत्यस्योपरि स्थितस्य वृत्तस्याकृतिं परिशीलयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:30&lt;br /&gt;
|द्वे स्क्वेर्-हेण्डल्स् अपि च द्वे सर्कल्-हेण्डल्स् अथवा आर्क्-हेण्डल्स् इतीमानि आकृतौ पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:37&lt;br /&gt;
| द्वे स्क्वेर्-हेण्डल्स् , वृत्ताकृतिं दीर्घवृत्तं कर्तुं उपयुज्येते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:44&lt;br /&gt;
| हेण्दल्स्-इतीमानि उपरि अधः अथवा वामतः दक्षिणतः च कर्षयन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:53&lt;br /&gt;
|आकृतौ परिवर्तनानि पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:56&lt;br /&gt;
|द्वे आर्क्-हेण्डल्स् एकस्योपरि अन्यत् स्थाप्येते । आर्क् हेण्डल् नुत्वा तत्, अप्रदक्षिणं चालयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:04&lt;br /&gt;
|अधुना द्वेऽपि आर्क्-हेण्डल् दृष्टुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|07:08&lt;br /&gt;
| इदम् आर्क्-हेण्डल् उपयुज्य , वृत्तं धनुरिव कर्तुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:14&lt;br /&gt;
|इमानि प्रदक्षिणम् अप्रदक्षिणं वा चालयित्वा आकृतौ परिवर्तनानि पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:24&lt;br /&gt;
|अधुना, टूल्-बोक्स् इत्यत्र ,रेक्टाङ्गल्-टूल् इत्यस्योपरि नुत्वा चतुरश्रोपरि नुदन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:30&lt;br /&gt;
| द्वे रीसैज़्-हेण्डल्स् अपि च द्वे आर्क्-हेण्डल्स् आकृत्याः उपरि दक्षिणतः दृश्यन्ते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:40&lt;br /&gt;
|पूर्ववत् , द्वे आर्क्-हेण्डल्स् एकस्योपरि अन्यत् स्थाप्येते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:43&lt;br /&gt;
| तयोः एकस्योपरि नुत्वा प्रदक्षिणं चालयतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:48&lt;br /&gt;
|अधुना वयं, द्वेऽपि आर्क्-हेण्डल्स् पश्यामः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:51&lt;br /&gt;
| इमानि हेण्डल्स्-उपयुज्य, चतुरश्रे वृत्ताकारस्य अश्रिं दातुं शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:56&lt;br /&gt;
|तानि प्रदक्षिणं अप्रदक्षिणं वा चालयित्वा आकृतौ परिवर्तनं पश्यन्तु ।.&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:02&lt;br /&gt;
|अधुना टूल्-बोक्स्-मध्ये strokes and polygon टूल् नुत्वा एकं पोलिगान् रचयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:08&lt;br /&gt;
|इदं सर्कल् टूल् इत्यस्याधः अस्ति । तन्नुदतु । &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:13&lt;br /&gt;
| वयं पूर्ववत् पोलिगान् रचयित्वा , हरिद्वर्णं पूरयाम ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:20&lt;br /&gt;
| सामान्यतः, पञ्चाश्रियुतं पोलिगान् , पञ्चभुजमेव वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:24&lt;br /&gt;
|टूल्-कण्ट्रोल्-बार् पश्यन्तु । अत्र number of polygon is five इति वर्तते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:32&lt;br /&gt;
| भवन्तः सङ्ख्यां चत्वारि इति परिवर्तयित्वा चतुरश्रम् अपि च त्रीणि इत्यनेन त्रिकोणं च रचयितुं शक्नुवन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:39&lt;br /&gt;
| एवमेव सङ्ख्याम् अधिकां कृत्वा पञ्चभुजं षड्भुजं च रचयितुं शक्नुवन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:44&lt;br /&gt;
|पोलिगान् इत्यस्योपरि रीसैज़्-हेण्डल् पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:47&lt;br /&gt;
| इदं पोलिगान् इत्यस्य परिमाणं परिवर्तितुं भ्रमणं कर्तुं वा उपयोक्तुमर्हति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:52&lt;br /&gt;
|इदं नक्षत्राकृतिं कर्तुं टूल्-कण्ट्रोल्-बार्-मध्ये, पोलिगान्-ऐकान् इत्यस्य पार्श्वे स्ट्रोक्-ऐकान् इतीदं नुदतु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:00&lt;br /&gt;
|नक्षत्राकृतौ द्वे हेण्डल्स् स्तः । अन्ते एकं सन्धावेकम् चेति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:06&lt;br /&gt;
| परिमाणं परिवर्तितुं अथवा भ्रामयितुं , स्टार् इत्यस्यान्ते विद्यमानं हेण्डल् नुदन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:12&lt;br /&gt;
|अन्यं हेण्डल्-उपयुज्य नक्षत्रस्य परिमाणं परिवर्तितुं अपि च परिभ्रमणं कर्तुं च शक्नुमः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:17&lt;br /&gt;
| तन्नुत्वा प्रदक्षिणं अप्रदक्षिणं वा भ्रामयित्वा परिमाणे आकृतौ च परिवर्तनं पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:25&lt;br /&gt;
|वयमधुना पाठस्यान्तमागतवन्तः । सङ्क्षेपेण -&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:30&lt;br /&gt;
|अस्मिन् पाठे वयं इङ्क्-स्केप् इत्यस्य इण्टर्फेस्-विषयं ज्ञातवन्तः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:34&lt;br /&gt;
|तथा आयतस्य, चतुरश्रस्य, वृत्तस्य, दीर्घवृत्तस्य, बहुभुजाकृतेः, नक्षत्रस्य च रचनाम्,&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:42&lt;br /&gt;
| आकृत्यै वर्णपूरणम् अपि च हेण्डल्-उपयुज्य आकृत्याः परिवर्तनञ्च ज्ञातवन्तः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:46&lt;br /&gt;
| युष्माकं एकः स्वाभ्यासः -&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:49&lt;br /&gt;
| एकं नीलवर्णस्य आयतं, रक्तवर्णस्य वृत्तं, हरिद्वर्णस्य सप्तभुजनक्षत्रञ्च रचयत ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:58&lt;br /&gt;
| युष्माकं कार्याभ्यासः एवं दृश्येत् ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10:03&lt;br /&gt;
| स्पोकन्-ट्युटोरियल् विषये अधिकविवरणं प्राप्तुं लिङ्क्-मध्ये विद्यमानं विडियो पश्यन्तु । इदं अस्य प्रकल्पस्य सारांशं वदति । &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:09&lt;br /&gt;
| उत्तमं बेण्ड्-विड्त् नास्ति चेत् अवचित्य पश्यन्तु ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:13&lt;br /&gt;
| स्पोकन्-ट्युटोरियल् टीम्, इमान् पाठानुपयुज्य कार्यशालां चालयति । ये ओन्-लैन्-परीक्षायां उत्तीर्णाः भवन्ति ते प्रमाणपत्रमपि प्राप्नुवन्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:22&lt;br /&gt;
| विवरणार्थं'''contact  @ spoken-tutorial.org.''' इत्यस्मै लिखन्तु । &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:28&lt;br /&gt;
| स्पोकन्-ट्युतोरियल् प्रकल्पः,  टोक् टु ए टीचर् इत्यस्य घटकमस्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:32&lt;br /&gt;
|अयं प्रकल्पः नेशनल् मिशन् ओन् एजुकेशन् ,ICT, MHRD, भारतसर्वकारेण अनुदानितमस्ति ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:38&lt;br /&gt;
| अधिकविवरनम् -  spoken-tutorial.org/NMEICT-intro  इत्यत्रोपलभ्यते ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:47&lt;br /&gt;
| वयं पाठस्य अन्ते स्मः ।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10:50&lt;br /&gt;
|अनुवादकः प्रवाचकश्च श्री नवीन भट्टः , उप्पिनपत्तनम् ।धन्यवादाः ।&lt;br /&gt;
|}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>NaveenBhat</name></author>	</entry>

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