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		<title>Health-and-Nutrition/C2/Essential-nutrition-actions-for-young-children/Hindi - Revision history</title>
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		<id>https://script.spoken-tutorial.org/index.php?title=Health-and-Nutrition/C2/Essential-nutrition-actions-for-young-children/Hindi&amp;diff=55946&amp;oldid=prev</id>
		<title>Bellatony911: Created page with &quot;{|border=1 | &lt;center&gt;Time&lt;/center&gt; |&lt;center&gt;Narration&lt;/center&gt;  |- | 00:00  | शिशुओं के लिए ''जरूरी पोषण क्रियाओं'' प...&quot;</title>
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				<updated>2022-06-17T10:41:48Z</updated>
		
		<summary type="html">&lt;p&gt;Created page with &amp;quot;{|border=1 | &amp;lt;center&amp;gt;Time&amp;lt;/center&amp;gt; |&amp;lt;center&amp;gt;Narration&amp;lt;/center&amp;gt;  |- | 00:00  | शिशुओं के लिए &amp;#039;&amp;#039;जरूरी पोषण क्रियाओं&amp;#039;&amp;#039; प...&amp;quot;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;New page&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{|border=1&lt;br /&gt;
| &amp;lt;center&amp;gt;Time&amp;lt;/center&amp;gt;&lt;br /&gt;
|&amp;lt;center&amp;gt;Narration&amp;lt;/center&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:00 &lt;br /&gt;
| शिशुओं के लिए ''जरूरी पोषण क्रियाओं'' पर बने स्पोकन ट्यूटोरियल'' में  आपका स्वागत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:07 &lt;br /&gt;
| इस ट्यूटोरियल में हम कुपोषण को रोकने के सही तरीकों के बारे में जानेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:15 &lt;br /&gt;
| ''जरूरी पोषण क्रियाएं'' कुपोषण को हटाने के लिए उठाये गए कदम हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:21 &lt;br /&gt;
| पहले 1,000 दिनों के समय इनकी जरूरत होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:26 &lt;br /&gt;
| गर्भधारण से लेकर शिशु के दूसरे जन्मदिन तक को पहले 1,000 दिन कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:34&lt;br /&gt;
| ''जरूरी पोषण क्रियाों'' को ''ईएनए''' के नाम से भी जाना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:39 &lt;br /&gt;
| पैदा हुए शिशु के लिए, सबसे पहला ''ईएनए''' जो किया जाता है, वो है गर्भनाल को दबा कर बंद करने में देरी ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:47 &lt;br /&gt;
| शिशु के पैदा होने के तुरंत बाद गर्भनाल को नहीं काटना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:53 &lt;br /&gt;
| नर्स को सबसे पहले गर्भनाल की धड़कन को महसूस करना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 00:58 &lt;br /&gt;
| जब धड़कन बंद हो जाए तो ही नाल को काटना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:02 &lt;br /&gt;
| नाल को कुछ देर के बाद बंद करने से गर्भनाल और शिशु के बीच रक्त का प्रवाह होने लगता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:09 &lt;br /&gt;
| इससे, पहले 6 महीनों तक के लिए शिशु में आयरन की मात्रा बेहतर होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:16 &lt;br /&gt;
| ऐसा करने से इन महीनों में शिशुओं में एनीमिया से बचाव होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:21 &lt;br /&gt;
| गर्भनाल को दबाने के बाद शिशु को स्तनपान कराना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:26 &lt;br /&gt;
| ऐसा करने के लिए, शिशु को मां के बिना कपड़े ओढ़े हुए पेट पर रखना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:32 &lt;br /&gt;
| शिशु पैदाइश से ही स्वाभाविक रूप से स्तनपान करना जानता है ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:38 &lt;br /&gt;
| इस स्‍वभाव से वह माँ के स्तन को ढूंढ सकता है ।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:41 &lt;br /&gt;
| और दूध पीना शुरू कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:45 &lt;br /&gt;
| इस पूरे प्रक्रिया को ब्रेस्ट क्रॉल कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:50&lt;br /&gt;
| एक अन्य ट्यूटोरियल में ब्रेस्ट क्रॉल के बारे में ज़्यादा बताया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:55 &lt;br /&gt;
| उस ट्यूटोरियल के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 01:59 &lt;br /&gt;
| शिशु के पैदा होने के एक घंटे के अंदर ही स्तनपान शुरू कराना बहुत जरूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:06 &lt;br /&gt;
| पहले दूध को ''कोलोस्ट्रम'' कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:09 &lt;br /&gt;
| नवजात शिशु के लिए यह पोषक तत्वों का सबसे पहला स्रोत है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:14 &lt;br /&gt;
| ''कोलोस्ट्रम'' में बीमारियों से लड़ने वाले तत्व और अच्छे फैट होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:20 &lt;br /&gt;
| मां का दूध शिशु के लिए ''विटामिन ए'' का पहला स्रोत भी होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:26 &lt;br /&gt;
| ''विटामिन ए'' स्वस्थ आंखों और रोग प्रतिरोधक शक्ति के लिए बहुत जरूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:33 &lt;br /&gt;
| मां का दूध पहले 6 महीनों के लिए ''विटामिन ए'' की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:40 &lt;br /&gt;
| 6 महीने के बाद ''विटामिन ए'' से भरपूर पूरक आहार देना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:47 &lt;br /&gt;
| असरदार स्तनपान के लिए, स्तन पर शिशु के मुँह की सही पकड़ सबसे जरूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 02:52 &lt;br /&gt;
| शिशु के मुंह का, स्तन पर गलत जुड़ाव होने की वजह से निप्पल से स्तनपान होगा ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:00 &lt;br /&gt;
| इससे शिशु को बहुत कम दूध मिलेगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:04 &lt;br /&gt;
| शिशु का मुंह एरीओला के निचले हिस्से से जुड़ा होना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:09 &lt;br /&gt;
| इससे शिशु को काफी दूध मिलेगा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:13 &lt;br /&gt;
| एरीओला, निप्पल के आसपास का काला भाग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:18 &lt;br /&gt;
| स्तनपान के सही तकनीकों के बारे में अन्य ट्यूटोरियल में बताया गया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:22 &lt;br /&gt;
| 6 महीने पूरे होने पर शिशु की पोषक तत्वों की जरूरत तेजी से बढ़ जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:29 &lt;br /&gt;
| इस दौरान सिर्फ स्तनपान काफी नहीं होता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:34 &lt;br /&gt;
| ऐसे में, स्तनपान के साथ पूरक आहार भी शिशु को खिलाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:40 &lt;br /&gt;
| जैसे ही शिशु 6 महीने पूरे कर ले, पूरक आहार शुरू कर दें ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:46 &lt;br /&gt;
| 6 महीने की उम्र का मतलब शिशु के जीवन के छठे महीने की शुरुआत नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 03:53 &lt;br /&gt;
| इसका मतलब है कि उसने 6 महीने पूरे कर लिए हैं और अपने जीवन का सातवां महीना शुरू कर दिया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:02 &lt;br /&gt;
| साथ ही उम्र के हिसाब से खाने की मात्रा और गाढ़ापन भी बदलते रहना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:10 &lt;br /&gt;
| शिशु के खाने में अलग-अलग खाने के समूहों की चीज़े होनी चाहिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:15 &lt;br /&gt;
| खाने के समूहों में पहला है स्तनपान । &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:19 &lt;br /&gt;
| दूसरा अनाज, जड़ और कंद हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:24 &lt;br /&gt;
| तीसरा फलियां, बीज और दाने हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:30 &lt;br /&gt;
| चौथा है दूध से बनी चीज़ें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:34 &lt;br /&gt;
| पांचवा मांस, मछली और मुर्गी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:38 &lt;br /&gt;
| छठा समूह है अंडा ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:41 &lt;br /&gt;
| सातवां ''विटामिन ए'' से भरपूर फल और सब्‍जी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:47 &lt;br /&gt;
| आठवां हैं बाकी के सभी फल और सब्जियां ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:53 &lt;br /&gt;
| शिशु के खाने में इन सभी आठ खाने के समूहों की चीज़े होनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 04:59 &lt;br /&gt;
| इन खानों के पोषक तत्वों से शिशु के विकास में मदद मिलती है ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:05 &lt;br /&gt;
| पूरक आहार के बारे में एक अन्य ट्यूटोरियल में विस्तार से बताया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:11&lt;br /&gt;
| आइए अब उन परिपोषक के बारे में जानते हैं जो शिशुओं को देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:16&lt;br /&gt;
| छह महीने से 5 साल तक के शिशु को ''आयरन-फोलिक एसिड'' परिपोषक देना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:23 &lt;br /&gt;
| स्वास्थ्य सेवक को इसे सप्‍ताह में दो बार शिशुओं को देना होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:29&lt;br /&gt;
| ''विटामिन ए'' परिपोषक साल में दो बार दी जानी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:34&lt;br /&gt;
| यह परिपोषक 9 महीने से 5 साल की उम्र तक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:40 &lt;br /&gt;
| परिपोषक स्वास्थ्य कर्मी के सलाह से ही देना चाहिए ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:46 &lt;br /&gt;
| अब हम दस्त लगे हुए शिशु के इलाज के लिए ''ईएनए'' देखेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:52 &lt;br /&gt;
| दस्त लगना, कुपोषण का एक प्रमुख कारण है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 05:56 &lt;br /&gt;
| यह शरीर में पानी की कमी, ''सोडियम'' और ''पोटेशियम''' के स्तर के बिगड़ने का कारण बनता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:03 &lt;br /&gt;
| ज्‍यादा दस्त होने पर, शिशु की मृत्यु भी हो सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:08 &lt;br /&gt;
| इसलिए दस्त का इलाज बहुत जरूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:13 &lt;br /&gt;
| ''ओआरएस'' और ''जिंक'' परिपोषक, दस्त के इलाज में मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:18 &lt;br /&gt;
| ''ओआरएस ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट'' है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:22 &lt;br /&gt;
| यह शरीर में पानी, ''सोडियम'' और ''पोटेशियम'' को पूरा करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:29 &lt;br /&gt;
| यह बाजार में पाउडर वाले पैकेट जैसा आसानी से मिल जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:35 &lt;br /&gt;
| ''ओआरएस'' का एक पैकेट इस्तेमाल करने के लिए इसे 1 लीटर उबालकर ठंडे किये हुए पानी में मिला लें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:43&lt;br /&gt;
| ''ओआरएस'' के साथ-साथ ''जिंक'' भी जरूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:48 &lt;br /&gt;
| ''जिंक'' दस्त की अवधी कम करता है,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:51 &lt;br /&gt;
| दस्त का बार-बार होना, और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:53 &lt;br /&gt;
| शिशु में दस्त की गंभीरता को भी कम करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 06:57 &lt;br /&gt;
| इससे शिशु की बीमारी से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:00&lt;br /&gt;
| इसे 14 दिनों के लिए दिन में एक बार दिया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:06&lt;br /&gt;
| 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को हर रोज 10 मिलीग्राम ''जिंक'' दिया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:13 &lt;br /&gt;
| 6 महीने से ज्यादा उम्र के शिशुओं को 20 मिलीग्राम ''जिंक'' हर रोज दिया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:21 &lt;br /&gt;
| ''जिंक'' की गोली, एक छोटे चम्मच में मां के दूध या ''ओआरएस'' में घोल कर दें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:27 &lt;br /&gt;
| आप उबालकर ठंडा किया हुआ पानी भी ले सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:31&lt;br /&gt;
| ''ओआरएस'' और ''जिंक'' की गोली स्वास्थ्य सेवक की सलाह के बाद ही देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:38 &lt;br /&gt;
| ''ओआरएस'' और ''जिंक'' के साथ 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को मां का दूध पिलाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:45 &lt;br /&gt;
| 6 से 24 महीने के शिशुओं को मां का दूध पिलाना चाहिए और पूरक आहार भी देना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:53&lt;br /&gt;
| याद रखें कि बीमारी के समय शिशु को मां का दूध बार बार पिलाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 07:59&lt;br /&gt;
| यह शिशु को जल्‍दी से ठीक होने और वजन के बढ़ने में मदद करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:04 &lt;br /&gt;
| इससे बीमार शिशु को आराम भी मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:07&lt;br /&gt;
| स्तनपान के साथ, हर शिशु को ''कंगारू मदर केयर'' भी दी जानी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:14 &lt;br /&gt;
| पैदा होने के समय कम वजन वाले शिशुओं के लिए ''कंगारू मदर केयर'' की भी सलाह दी जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:20&lt;br /&gt;
| ''कंगारू मदर केयर'' के बारे में एक अन्य ट्यूटोरियल में बताया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:26&lt;br /&gt;
| यदि शिशु 6 महीने से बड़ा है, तो उसका खाना डेढ़ गुना बढ़ा दें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:34&lt;br /&gt;
| ऐसा तब करें जब ठीक होने पर शिशु को फिर से भूख लगने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:40 &lt;br /&gt;
| अलग-अलग तरह का खाना देकर शिशु को खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:46 &lt;br /&gt;
| उसकी भूख के हिसाब से उसे पहले और दूसरे प्रकार के पोषक तत्व दें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 08:53 &lt;br /&gt;
| पहले और दूसरे प्रकार के पोषक तत्वों के बारे में एक अन्य  ट्यूटोरियल में बताया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:01 &lt;br /&gt;
| शिशु के ज्यादा बीमार होने पर मां को उसे जल्‍दी से स्वास्थ्य सेवक को दिखाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:07 &lt;br /&gt;
| स्वास्थ्य सेवक को ज्‍यादा बीमार शिशु को ''एनआरसी'' भेजना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:14 &lt;br /&gt;
| ''एनआरसी'' ''पोषण पुनर्वास केंद्र'' है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:20 &lt;br /&gt;
| यह गंभीर रूप से कुपोषित शिशुओं को फिर से तंदुरुस्त करने का केंद्र है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:27&lt;br /&gt;
| यह केंद्र शिशुओं को विशेष पोषण चिकित्सा प्रदान करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:33 &lt;br /&gt;
| अगर शिशु 6 महीने की उम्र पूरी कर चुके हैं तो यह उन्हें घर का बना खाना खाने के लिए तैयार करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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| 09:40&lt;br /&gt;
| ये माओं को स्तनपान के बारे में,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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| शिशु पोषण और&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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| 09:46 &lt;br /&gt;
| शिशु की देखभाल की सही जानकारी देते है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:48 &lt;br /&gt;
| शिशु को तंदुरुस्त रखने के लिए '''जरूरी पोषण क्रियाओं''' का पालन करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 09:54&lt;br /&gt;
| वे शिशुओं में कुपोषण को रोकने में भी मदद करते हैं।&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
| 09:59 &lt;br /&gt;
| अब यह ट्यूटोरियल यहीं समाप्त होता है। आई आई टी बॉम्बे से मैं बेल्ला टोनी आप से विदा लेती हूँ । हम से जुड़ने के लिए धन्यवाद।&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bellatony911</name></author>	</entry>

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